
न्यूज डेस्क, आसनसोल : कोजागरी लक्खी पूजा को लेकर शिल्पांचल के बाजारों में इन दिनों रौनक चरम पर है। धन, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी मां लक्खी की आराधना की तैयारियों में श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ जुटे हुए हैं। पूजा को लेकर आसनसोल के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में खरीदारी का सिलसिला तेज हो गया है। मां लक्खी की प्रतिमाओं से लेकर पूजन सामग्री, फल, फूल, नारियल और सब्जियों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। शनिवार को शहर के विभिन्न बाजारों में देर शाम तक खरीदारों की आवाजाही बनी रही। पूजा की तैयारियों के बीच बाजारों में बढ़ी चहल-पहल से कारोबारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं। आसनसोल में मां लक्खी की प्रतिमाओं की दुकानों पर श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार प्रतिमाओं की खरीदारी करते नजर आए। इस वर्ष प्रतिमाओं की कीमतों में पिछले साल की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है। लोग अपनी परंपरा के अनुसार पूजा की तैयारियों में जुटे रहे और प्रतिमाओं के साथ अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदारी करते रहे। कोजागरी लक्खी पूजा के मद्देनजर आसनसोल के सब्जी बाजारों में भी खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। पूजा के दौरान मां लक्खी को खिचड़ी का भोग अर्पित करने की परंपरा के चलते बंदगोभी, गाजर, फूलगोभी, बैंगन समेत विभिन्न प्रकार की सब्जियों की मांग बढ़ गई है। मांग में तेजी का असर सब्जियों की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। बाजार में सब्जियों के दाम औसतन 10प्रतिशत तक बढ़ने के बावजूद श्रद्धालु पूजा के लिए जरूरी सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं। आश्विन पूर्णिमा की रात मां लक्खी की आराधना का विशेष महत्व है । आसनसोल के एक पुरोहित ने बताया कि हिंदू धर्म में कोजागरी लक्खी पूजा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह पूजा आश्विन मास की पूर्णिमा की रात श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात देवी महालक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और श्रद्धालुओं पर धन, वैभव, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की कृपा बरसाती हैं।आस्था से जुड़े इस पर्व को लेकर परिवारों में विशेष उत्साह रहता है। यही वजह है कि पूजा से पहले बाजारों में खरीदारी की रौनक बढ़ जाती है और शिल्पांचल के विभिन्न इलाकों में उत्सव जैसा माहौल दिखाई देने लगता है। कोजागरी लक्खी पूजा को लेकर आसनसोल के बाजारों में बढ़ी चहल-पहल धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय कारोबार की सक्रियता को भी दर्शा रही है। प्रतिमाओं और पूजन सामग्री की खरीदारी से लेकर भोग के लिए सब्जियों की व्यवस्था तक, श्रद्धालु पर्व की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।







