
न्यूज डेस्क, बर्नपुर : ढाक की गूंजती थाप, मां दुर्गा के जयकारे, सिंदूर से सजे चेहरे और आंखों में विदाई की नमी… मां दुर्गा की विदाई के मौके पर कुछ ऐसा ही भावुक और भक्तिमय माहौल देखने को मिला। मां की विदाई के साथ जहां भक्तों के मन में बिछड़ने का दर्द नजर आया, वहीं अगले साल मां के फिर से आगमन की उम्मीद ने माहौल को उत्साह और उमंग से भी भर दिया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को विदाई दी और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। आसनसोल के अघोरीपाड़ा ग्राम दुर्गा पूजा में आयोजित घट विसर्जन के दौरान भक्ति और बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की खूबसूरत झलक देखने को मिली। पूजा परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भागीदारी और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर उत्साह का माहौल रहा। मां दुर्गा की विदाई की बेला में भक्तों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना की और मां से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई। एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर महिलाओं ने इस परंपरा को उत्साह के साथ मनाया। लाल सिंदूर से सजे चेहरे, एक-दूसरे के प्रति स्नेह और मां दुर्गा के प्रति अटूट आस्था ने इस आयोजन को खास बना दिया। हालांकि, मां की विदाई के क्षण में कई महिलाओं की आंखें नम भी नजर आईं। खुशी और भावुकता के इस संगम ने पूरे वातावरण को भावनाओं से भर दिया। वहीं, घट विसर्जन के दौरान ढाक की पारंपरिक धुन ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। ढाक की थाप सुनते ही महिला और पुरुष श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। कोई ताल पर नाचता नजर आया, तो कोई मां दुर्गा के जयकारे लगाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करता दिखाई दिया। ढाक की गूंज और भक्तों के उत्साह ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। बंगाल में दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। सिंदूर खेला से लेकर मां की विदाई तक हर रस्म में भावनाओं और आस्था का विशेष महत्व होता है। अघोरीपाड़ा ग्राम दुर्गा पूजा में भी यही रंग देखने को मिला, जहां श्रद्धालुओं ने परंपराओं का पालन करते हुए मां को विदाई दी। घट विसर्जन के साथ पूजा उत्सव का समापन हुआ, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में मां दुर्गा के प्रति आस्था और अगले वर्ष उनके दोबारा आगमन की प्रतीक्षा बनी रही। भक्तों ने नम आंखों और जुड़े हाथों से मां से प्रार्थना की कि वह सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और अगले साल फिर से धूमधाम के साथ उनके आगमन का अवसर मिले।








