
फर्जी कॉल सेंटर का भांडाफोड़, मास्टरमाइंड पकड़ाया
न्यूज डेस्क, कोलकाता / हुगली : पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिसड़ा में पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का कथित मास्टरमाइंड मोहित पांडे भी शामिल है। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को अलग-अलग तरीकों से झांसे में लेकर ऑनलाइन ठगी को अंजाम देता था। पूरे मामले का खुलासा गुरुवार को श्रीरामपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीसीपी अर्णब विश्वास ने किया। उन्होंने बताया कि पुलिस को काफी समय से इस गिरोह की गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने रिसड़ा के एमएस रोड और एस डी मुखर्जी लेन स्थित दो किराये के परिसरों पर एक साथ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान वहां से फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने का खुलासा हुआ और मौके से नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अत्यंत संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। गिरोह के सदस्य पहले अपने संपर्क सूत्रों और अन्य माध्यमों से देशभर के लोगों के मोबाइल नंबर जुटाते थे। इसके बाद कॉल सेंटर के कर्मचारी अलग-अलग पहचान बनाकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें आकर्षक ऑफर का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। जांच के अनुसार, कभी ये लोग किसी नामी कंपनी के प्रतिनिधि बनकर कम ब्याज पर लोन दिलाने का दावा करते थे, तो कभी लाखों रुपये की लॉटरी लगने का झांसा देते थे। कई मामलों में बेरोजगार युवाओं को प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने का वादा किया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति उनकी बातों पर भरोसा करता, उसे एक क्यूआर कोड या लिंक भेजा जाता और केवाईसी, पहचान पत्र, बैंक विवरण तथा अन्य दस्तावेज साझा करने के लिए कहा जाता था। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित द्वारा दस्तावेज या बैंक संबंधी जानकारी साझा करते ही आरोपी तकनीकी तरीकों से उसके बैंक खाते तक पहुंच बना लेते थे और कुछ ही मिनटों में खाते से पैसे निकाल लेते थे। कई मामलों में पीड़ितों को ठगी का एहसास तब होता था, जब उनके मोबाइल पर बैंक से रकम निकलने का संदेश आता था। प्रारंभिक जांच में पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में अब तक 16.78 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध लेन-देन और साइबर ठगी से जुड़ी राशि का पता चला है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि यह केवल शुरुआती आंकड़ा है और जांच आगे बढ़ने के साथ ठगी की कुल रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के कई राज्यों में सक्रिय था। शुरुआती जांच में विभिन्न राज्यों में इस गिरोह के खिलाफ कम से कम 33 साइबर अपराध के मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। संबंधित राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है ताकि गिरोह की गतिविधियों और पुराने मामलों का पूरा रिकॉर्ड जुटाया जा सके।छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग से जुड़े सामान भी बरामद किए हैं। इनमें 21 मोबाइल फोन, 16 डेबिट कार्ड, 3 चेकबुक और 3 बैंक पासबुक शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन सामानों का इस्तेमाल फर्जी बैंक खातों के संचालन, धन के लेन-देन और साइबर ठगी को अंजाम देने में किया जाता था। जब्त किए गए सभी उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के नवादा निवासी एवं कथित मास्टरमाइंड मोहित पांडे , आंध्र प्रदेश के एसके सागर , कर्नाटक के पुनीत कुमार , रिसड़ा निवासी मोहम्मद तौसीफ उर्फ चांद , चंदननगर निवासी दीपक ठाकुर , बिहार के प्रिय रंजन कुमार पांडे, उत्तर प्रदेश के राहुल पांडे कर्नाटक के शिवा कुमार एन तथा ओडिशा के बी वी नरेश के रूप में हुई है। पुलिस सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस साइबर ठगी नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं, अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया गया है, ठगी की कुल रकम कितनी है और यह पैसा किन-किन बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह के तार देश के अन्य राज्यों या किसी बड़े साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े हैं या नहीं। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन, लॉटरी, नौकरी, सस्ते लोन या निवेश संबंधी आकर्षक प्रस्तावों पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, डेबिट कार्ड विवरण या क्यूआर कोड स्कैन करने जैसी संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें। किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।







