बीएसएफ ने भारत-बांग्लादेश सीमा को किया अभेद्य बनाने का अभियान तेज, 12 फीट ऊंची स्मार्ट फेंसिंग का निर्माण शुरू

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न्यूज डेस्क, कोलकाता : भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने व्यापक स्तर पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार की ओर से 1,024.75 एकड़ भूमि उपलब्ध कराए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से लेकर सुंदरबन तक सीमा क्षेत्र में 12 फीट ऊंची आधुनिक ‘स्मार्ट फेंसिंग’ के निर्माण का कार्य तेज गति से शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद सीमा सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित हो जाएगी। जानकारी के अनुसार, यह स्मार्ट फेंसिंग केवल पारंपरिक कंटीले तारों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों का समावेश किया जाएगा। पूरी सीमा पर लेजर सेंसर, थर्मल इमेजिंग कैमरे, नाइट विजन निगरानी प्रणाली, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, मोशन सेंसर तथा रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से दिन-रात, कोहरे, बारिश या अंधेरे जैसी परिस्थितियों में भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सकेगा। बीएसएफ के सूत्रों के अनुसार, सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को बहुस्तरीय बनाया जा रहा है। जिन इलाकों में नदी या दलदली क्षेत्र होने के कारण सामान्य बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां फ्लोटिंग बॉर्डर आउट पोस्ट (Floating BOP) की संख्या बढ़ाई जाएगी। इन तैरते सुरक्षा चौकियों के माध्यम से नदी मार्ग से होने वाली घुसपैठ, मवेशी तस्करी, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। सुंदरबन जैसे संवेदनशील इलाकों में जलमार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी।
बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग समय की आवश्यकता बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए पूरी परियोजना को तकनीक आधारित सुरक्षा मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, स्मार्ट फेंसिंग परियोजना के तहत एक एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम भी विकसित किया जाएगा, जहां विभिन्न सेंसरों और कैमरों से प्राप्त सूचनाओं की निगरानी रियल टाइम में की जाएगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही निकटतम बीएसएफ पोस्ट और गश्ती दल को तत्काल अलर्ट भेजा जाएगा, जिससे कुछ ही मिनटों में कार्रवाई संभव हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-बांग्लादेश सीमा का बड़ा हिस्सा नदी, दलदली जमीन और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिसके कारण पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था कई स्थानों पर चुनौतीपूर्ण रही है। ऐसे में आधुनिक स्मार्ट फेंसिंग और डिजिटल निगरानी प्रणाली सीमा सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगी। बीएसएफ ने स्पष्ट किया है कि सीमा की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए मानव संसाधन के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय किया जाएगा। नियमित गश्त, ड्रोन निगरानी (जहां आवश्यक हो), इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती के जरिए सीमा को अभेद्य बनाने की दिशा में लगातार काम किया जाएगा अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के विभिन्न चरणों में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी। सरकार और बीएसएफ का लक्ष्य है कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों को अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षित बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत किया जाए।

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