आसनसोल कोर्ट के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में काम काज किया स्थगित, मामले के निष्पक्ष जांच की मांग

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न्यूज डेस्क, आसनसोल : पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच जारी विवाद के कारण आसनसोल न्यायालय में मंगलवार को लगातार तीसरे दिन भी न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप रहा। अधिवक्ताओं के आंदोलन का असर पूरे कोर्ट परिसर में साफ तौर पर देखने को मिला। अदालतों में नियमित सुनवाई नहीं हो सकी, जिसके कारण सैकड़ों मामलों की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी। वहीं, विभिन्न मामलों में गिरफ्तार आरोपियों की नियमित पेशी भी प्रभावित रही। न्यायिक कार्य बाधित होने से वादकारी, आरोपी पक्ष, उनके परिजन और दूर-दराज से पहुंचे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता अदालत परिसर में एकत्र हुए और अपने आंदोलन को जारी रखा। अधिवक्ताओं ने किसी भी अदालत में पेश होकर पैरवी नहीं की, जिसके चलते अधिकांश न्यायिक कार्य प्रभावित रहे। अदालत परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में काफी सन्नाटा दिखाई दिया, जबकि अपने मामलों की सुनवाई के लिए पहुंचे लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के डीसी सेंट्रल ध्रुव दास स्वयं आसनसोल कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं से बातचीत कर गतिरोध समाप्त करने तथा न्यायिक कार्य सामान्य करने का प्रयास किया। पुलिस प्रशासन की ओर से स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की पहल की गई, लेकिन अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों पर अडिग रहते हुए फिलहाल आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया। बैठक के दौरान अधिवक्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद डीसी सेंट्रल ध्रुव दास पुलिस अधिकारियों के साथ न्यायालय परिसर से वापस लौट गए। हालांकि प्रशासन की ओर से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के प्रयास जारी रहने की बात कही जा रही है। आसनसोल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अयन रंजन मुखर्जी ने कहा कि अधिवक्ता नरेन साव से जुड़े मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराना पुलिस की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि यदि किसी अधिवक्ता के खिलाफ कोई शिकायत है तो उसकी जांच कानून के दायरे में निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, लेकिन एकतरफा कार्रवाई या पक्षपातपूर्ण रवैया किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने के लिए पुलिस तथा प्रशासन को भी संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस प्रकार की कार्रवाई की गई है, उससे अधिवक्ताओं में असंतोष व्याप्त है। जब तक मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बार एसोसिएशन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है। अधिवक्ता न्यायिक कार्य से दूर रहकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं और आगे की रणनीति बार एसोसिएशन की बैठक में तय की जाएगी। तीसरे दिन भी न्यायिक कार्य बाधित रहने का सीधा असर अदालत में लंबित मामलों पर पड़ा। दीवानी और फौजदारी दोनों प्रकार के अनेक मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी। कई मामलों में पुलिस आरोपियों को अदालत लेकर पहुंची, लेकिन नियमित सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें वापस ले जाना पड़ा। वहीं, जमानत, अंतरिम राहत और अन्य जरूरी मामलों में आए लोगों को भी निराशा हाथ लगी। कोर्ट परिसर में मौजूद कई वादकारियों ने कहा कि लगातार तीन दिनों से न्यायिक कार्य ठप रहने के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों का समय और धन दोनों खर्च हो रहे हैं, जबकि मामलों का निस्तारण लगातार टलता जा रहा है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर न्यायिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है। सभी की निगाहें अब आसनसोल बार एसोसिएशन के अगले निर्णय और पुलिस प्रशासन की आगामी पहल पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच जल्द बातचीत के जरिए कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा, जिससे न्यायालय का नियमित कामकाज फिर से सुचारु रूप से शुरू हो सके और आम लोगों को राहत मिल सके।

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