
घर वालों को बिना बताए निकली नाबालिग, रेल कर्मचारी ने सुरक्षित घर वालों को सौंपा
न्यूज डेस्क, डेहरी : भारतीय रेलवे सिर्फ यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुँचाने का ही काम नहीं करता, बल्कि जरूरत पड़ने पर लोगों की सुरक्षा और उनकी जिंदगी को सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रेलवे के कर्मठ अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करते हुए हर दिन ऐसे अनेक कार्य कर रहे हैं, जिनसे हजारों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौट रही है। घर से बिना बताए निकल जाने वाले बच्चों, किशोरों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे और रेलवे सुरक्षा बल लगातार सतर्क रहते हैं। ऐसे मामलों में न केवल उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है, बल्कि उन्हें किसी भी प्रकार की अनहोनी या गलत संगति से बचाते हुए सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुँचाने का हर संभव प्रयास किया जाता है। इसी मानवीय पहल का एक प्रेरणादायक उदाहरण उस समय सामने आया, जब रेलगाड़ी संख्या 12792 में ड्यूटी के दौरान टिकट चेकिंग स्टाफ श्री जी. दुबे की नजर एक नाबालिग लड़की पर पड़ी, जो बिना टिकट यात्रा कर रही थी। जब उन्होंने उससे संवेदनशीलता के साथ बातचीत की और पूछताछ की, तो पता चला कि वह बिना किसी को बताए अपने घर से निकल आई है। बच्ची डरी हुई थी और उसे यह भी नहीं पता था कि आगे उसे कहाँ जाना है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए टिकट चेकिंग स्टाफ ने तुरंत मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। सबसे पहले बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया ताकि वह किसी भी प्रकार के खतरे से दूर रहे। इसके बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के अधिकारियों के सहयोग से उसके परिजनों का पता लगाया गया और उनसे तत्काल संपर्क स्थापित किया गया। घटना की पूरी जानकारी मिलने के बाद परिजन जल्द ही रेलवे स्टेशन पहुँचे। आवश्यक पहचान और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद बच्ची को सकुशल उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। काफी देर से अपनी बेटी की तलाश में परेशान परिवार ने जब उसे सुरक्षित देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजनों की आँखों में राहत और चेहरे पर मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने भारतीय रेलवे, टिकट चेकिंग स्टाफ श्री जी. दुबे तथा रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सतर्कता, संवेदनशीलता और समय पर की गई कार्रवाई ने उनकी बेटी को सुरक्षित वापस घर पहुँचा दिया। भारतीय रेलवे की यह पहल एक बार फिर साबित करती है कि रेलवे केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और मानवता के साथ निभाने वाला एक भरोसेमंद संस्थान भी है। यात्रियों की सुरक्षा, विशेषकर बच्चों और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात तत्पर रहते हैं। ऐसे प्रेरणादायक कार्य न केवल लोगों का विश्वास मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सुरक्षा, संवेदनशीलता और मानवता का संदेश भी फैलाते हैं।






