
आसनसोल के सुगम पार्क से निकला कांवड़ियों का जत्था, बाबा के जलाभिषेक को दिखा आस्था का भाव
न्यूज डेस्क, आसनसोल : पवित्र श्रावण माह की पहली सोमवारी के अवसर पर भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए पूरे शिल्पांचल में भक्ति और आस्था का अद्भुत माहौल देखने को मिला। आसनसोल समेत आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं का जत्था बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए रवाना हुआ। कोई रेल मार्ग से तो कोई सड़क मार्ग से अपनी धार्मिक यात्रा पर निकले। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक को लेकर उत्साह, श्रद्धा और अटूट आस्था साफ झलक रही थी। शुक्रवार से ही बाबा नगरी देवघर को आसनसोल रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी। स्टेशन परिसर भगवा वस्त्र धारण किए कांवड़ियों से पूरी तरह दृश्यमान रहा। श्रद्धालुओं के हाथों में सजी हुई कांवड़, माथे पर चंदन-भस्म का तिलक और कंधों पर ध्वज उनकी आस्था को दर्शा रहे थे। पूरे स्टेशन परिसर में बोल बम, हर-हर महादेव, “बाबा नगरी चलो” और “जय बाबा बैद्यनाथ” के जयघोष लगातार गूंजते रहे, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो गया। यात्रियों और स्थानीय लोगों ने भी इस आध्यात्मिक माहौल का आनंद लिया। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पहले सुल्तानगंज पहुंचेंगे, जहां उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर लगभग 105 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा पैदल तय करेंगे। इसके बाद देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। मान्यता है कि श्रावण माह में बाबा बैद्यनाथ पर गंगाजल अर्पित करने से भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन आस्था से परिपूर्ण यात्रा में शामिल होते हैं।आसनसोल शहर के विभिन्न इलाकों से भी कांवड़ियों के दल पूरे उत्साह के साथ रवाना हुए। आसनसोल के सुगम पार्क से सुगम पार्क कांवड़िया संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिवभक्त सड़क मार्ग से देवघर के लिए निकले। इसके अलावा जेन नेक्स, राम किशुन डंगाल, कल्ला, मुर्गासोल, रानीगंज तथा अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के कई जत्थे धार्मिक ध्वज और कांवड़ के साथ यात्रा पर रवाना हुए। रवाना होने से पहले विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना की गई और उनके सुरक्षित एवं सफल यात्रा की कामना की गई। कई सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने कांवड़ यात्रियों को फल, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा सामग्री तथा अन्य आवश्यक वस्तुएं वितरित कर उनकी यात्रा को सुगम बनाने का प्रयास किया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर तथा पुष्पवर्षा कर विदाई दी। इस दौरान श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह और धार्मिक उमंग देखने को मिली। श्रावण मास की पहली सोमवारी को लेकर पूरे आसनसोल और शिल्पांचल क्षेत्र में शिवभक्ति का विशेष वातावरण बना रहा। मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। वहीं, देवघर की ओर रवाना हो रहे कांवड़ियों के जत्थों ने पूरे क्षेत्र को भगवामय और भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जल अर्पित करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है और वे हर वर्ष इसी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस पावन यात्रा में शामिल होते हैं।






