
न्यूज डेस्क, रांची / झारखंड : देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित खान बचाव प्रतियोगिता की मेज़बानी मिलना सीसीएल के लिए गौरव और विश्वास का विषय है। यह दायित्व कंपनी की संगठनात्मक क्षमता, सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के सफल संचालन में अर्जित विश्वसनीयता को रेखांकित करता है। बैठक में खान सुरक्षा उपमहानिदेशक (दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र) डॉ. एस.एस. प्रसाद, सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री निलेन्दु कुमार सिंह, निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री सी.एस. तिवारी, निदेशक (तकनीकी/परियोजना एवं योजना) श्री अनूप हंजूरा, डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी श्री श्याम मिश्रा, श्री नागेश्वरराव नामावरपू, श्री अजीत कुमार, श्री संकेत कुमार तथा श्री परवेज़ आलम, सीआईएल मुख्यालय के कार्यकारी निदेशक (सुरक्षा एवं बचाव) श्री सी.पी. गर्ग, महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं बचाव) श्री ई. कार्तिकेयन सहित देशभर की विभिन्न कोयला एवं धातु खनन कंपनियों के महाप्रबंधकों (सुरक्षा एवं बचाव), रेस्क्यू स्टेशनों के प्रभारियों, जेएसएसपीएस के सीईओ तथा सीसीएल मुख्यालय एवं बरका-सयाल क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक को संबोधित करते हुए सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री निलेन्दु कुमार सिंह ने कहा कि डीजीएमएस सीआईएल और सभी सहभागी कंपनियों के सहयोग से सीसीएल इस प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आयोजित करेगा। इसे खनन उद्योग के लिए एक अनुकरणीय और ऐतिहासिक आयोजन बनाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। बैठक के अध्यक्ष डॉ एस एस प्रसाद ने प्रतियोगिता की तकनीकी गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने सभी सहभागी संस्थाओं से बेहतर समन्वय और सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 55वीं अखिल भारतीय खान बचाव प्रतियोगिता का आयोजन 29 नवंबर से 6 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। उद्घाटन समारोह, ड्रिल व मार्च-पास्ट, फर्स्ट एड और रोप रेस्क्यू जैसी प्रमुख स्पर्धाएँ जेएसएसपीएस (खेलगांव, रांची) में होंगी। समापन व पुरस्कार वितरण समारोह भी यहीं आयोजित किया जाएगा। रेस्क्यू व रिकवरी, फ्रेश एयर बेस और कैप्टन्स रिपोर्ट से जुड़ी व्यावहारिक स्पर्धाएँ भुरकुंडा भूमिगत खदान, बरका-सयाल क्षेत्र में सम्पन्न कराई जाएँगी। प्रतियोगिता में लगभग 37 टीमों के शामिल होने की संभावना है। बैठक में महिला टीमों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनके लिए आवश्यक सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया।
