
बिजय पाल मेमोरियल बीएड कॉलेज में विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर की मनाई गई जयंती
न्यूज डेस्क, आसनसोल : आसनसोल के बिजय पाल मेमोरियल बीएड कॉलेज में 22 श्रावण के अवसर पर विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर को स्मरण करते हुए एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने गीत, कविता, काव्य-पाठ और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की अमर रचनाओं को याद किया। उनकी कालजयी कविताओं और साहित्यिक रचनाओं की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावपूर्ण और साहित्यिक रंग से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद छात्राओं ने गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रसिद्ध कविताओं और रचनाओं का सरल एवं प्रभावशाली ढंग से काव्य-पाठ किया। छात्राओं की प्रस्तुति में गुरुदेव की रचनाओं के प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उनके गीतों और कविताओं ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सभी को रवींद्र साहित्य की गहराई एवं मानवीय संवेदनाओं से रूबरू कराया। इस अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थियों ने रवींद्रनाथ ठाकुर की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। गीतों और कविताओं के माध्यम से प्रेम, प्रकृति, मानवता और जीवन के विभिन्न पहलुओं को अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम के दौरान गुरुदेव की रचनाओं के उन भावों को विशेष रूप से सामने लाया गया, जो आज भी समाज और नई पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं। वक्ताओं ने कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर केवल एक महान कवि और साहित्यकार ही नहीं, बल्कि संगीत, कला, शिक्षा और मानवतावादी विचारों के भी प्रबल समर्थक थे। उनका साहित्य आज भी लोगों को संवेदनशील, मानवीय और बेहतर समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है। उनकी रचनाओं में प्रकृति, प्रेम, स्वतंत्र चिंतन और इंसानियत का जो संदेश मिलता है, वह समय बीतने के साथ और भी प्रासंगिक होता जा रहा है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। गुरुदेव की कविताओं और गीतों की प्रस्तुति के दौरान उपस्थित लोगों ने भी भावपूर्ण ढंग से उनका स्मरण किया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को रवींद्रनाथ ठाकुर के साहित्य और उनके विचारों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि रवींद्रनाथ ठाकुर का साहित्य, संगीत और मानवता के प्रति उनका दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनकी अमर रचनाएं भारतीय साहित्य और संस्कृति की ऐसी धरोहर हैं, जिनसे समाज को निरंतर नई ऊर्जा और दिशा मिलती रहेगी।