
आसनसोल नगर निगम बोर्ड भंग, पूर्व निगम आयुक्त अदिति चौधरी बनीं प्रशासक
न्यूज डेस्क, आसनसोल : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद आसनसोल नगर निगम को लेकर लंबे समय से चल रहे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध के बीच राज्य सरकार के नगर एवं शहरी विकास विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए 7 जुलाई 2026 को आसनसोल नगर निगम बोर्ड को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब नगर निगम का संचालन निर्वाचित बोर्ड के स्थान पर प्रशासक के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए आसनसोल नगर निगम की पूर्व निगम आयुक्त एवं आईएएस अधिकारी अदिति चौधरी को नगर निगम का प्रशासक नियुक्त किया गया है। वह अगले आदेश तक निगम के प्रशासन, वित्तीय कार्यों और नागरिक सेवाओं की देखरेख करेंगी। नगर निगम बोर्ड भंग होने की खबर के बाद बुधवार को निगम मुख्यालय का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। मुख्य भवन स्थित आशुतोष हॉल और विभिन्न प्रशासनिक कक्षों के बाहर लगे मेयर, उपमेयर, चेयरमैन, मेयर परिषद सदस्यों तथा बोरो चेयरमैनों के नाम वाले नेम प्लेट हटा दिए गए। मेयर बिधान उपाध्याय, उपमेयर अभिजीत घटक और वशीमुल हक, चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी, मेयर परिषद सदस्य गुरुदास चटर्जी, इंद्राणी मिश्रा, मानस दास तथा बोरो चेयरमैन उत्पल सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों से भी निर्वाचित बोर्ड से जुड़े पहचान चिह्न हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।राज्य सरकार के नगर एवं शहरी विकास विभाग के अनुसार पिछले कुछ समय से नगर निगम के कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि पिछले दो महीनों से निगम बोर्ड की नियमित बैठकें नहीं बुलाई गईं, कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लंबित रहे तथा नागरिकों को पेयजल, सफाई, जल निकासी और अन्य आवश्यक नगर सेवाओं के संचालन में बाधाएं उत्पन्न हुईं। इसके अलावा कुछ मामलों में होल्डिंग टैक्स में कथित रूप से मनमाने ढंग से छूट दिए जाने की भी शिकायतें विभाग तक पहुंची थीं। इन शिकायतों के आधार पर नगर एवं शहरी विकास विभाग के सचिव की ओर से आसनसोल नगर निगम को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा गया था। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राप्त जवाब विभाग को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद राज्य सरकार ने नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत पूरे बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया।
राजनीतिक घटनाक्रम भी बना चर्चा का विषय :
नगर निगम बोर्ड भंग होने से पहले ही आसनसोल की राजनीति में कई घटनाक्रम तेजी से बदले थे। नगर निगम के दो बोरो चेयरमैन और छह तृणमूल कांग्रेस पार्षदों के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में बोर्ड के भविष्य को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं। इसी बीच तत्कालीन मेयर बिधान उपाध्याय की कोलकाता में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के साथ हुई मुलाकात भी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बनी। इसके बाद नगर एवं शहरी विकास विभाग ने निगम प्रशासन से कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा था। अंततः राज्य सरकार ने निर्वाचित बोर्ड को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया।
पूर्व मेयर की प्रतिक्रिया :
नगर निगम बोर्ड भंग किए जाने पर पूर्व मेयर बिधान उपाध्याय ने राज्य सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चुने गए बोर्ड को कार्यकाल समाप्त होने से पहले भंग करना उचित नहीं है। उनके अनुसार यह निर्णय लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर नगर सेवाएं उपलब्ध कराना है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई प्रशासनिक व्यवस्था में शहर के विकास कार्य और नागरिक सुविधाएं बाधित नहीं होंगी।