
न्यूज डेस्क, आसनसोल : आसनसोल के जीटी रोड स्थित राहा लेन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर उठे विवाद ने अब प्रशासनिक रूप ले लिया है। राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने नगर निगम के तीन अधिकारियों पर सरकारी निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए उन्हें कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी करने की जानकारी दी है। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध निलंबन सहित कठोर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। शनिवार को आसनसोल नगर निगम मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार और प्रशासन के स्तर पर जो निर्णय लिए जाते हैं, उनका पालन करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। किसी भी अधिकारी को निर्धारित प्रक्रिया से हटकर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। मंत्री ने बताया कि हाल ही में प्राप्त शिकायतों के बाद गुरुवार को नगर निगम अधिकारियों, प्रशासन और संबंधित पक्षों के साथ बैठक हुई थी। बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि सड़क किनारे अतिक्रमण कर बैठे दुकानदारों को पहले विधिवत नोटिस दिया जाएगा तथा उन्हें स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिनों का समय दिया जाएगा। इसके साथ ही आगामी दुर्गापूजा और छठ महापर्व को देखते हुए बाजार के भीतर वर्षों से व्यवसाय कर रहे पुराने हॉकर्स को तत्काल नहीं हटाने तथा उन्हें 10 नवंबर तक का समय देने पर भी सहमति बनी थी, ताकि त्योहारों के दौरान उनकी आजीविका प्रभावित न हो। मंत्री के अनुसार, इन निर्देशों के लागू होने से पहले ही नगर निगम के तीन अधिकारियों की पहल पर कुछ दुकानों पर बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो यह तय प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्देशों का उल्लंघन है, जिसकी जांच कराई जा रही है। अग्निमित्रा पाल ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि उनके जवाब में संतोषजनक कारण नहीं मिला तो सरकार नियमों के अनुसार कड़ी विभागीय कार्रवाई करेगी। उन्होंने दोहराया कि प्रशासनिक कार्यवाही में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण दोनों का पालन किया जाना आवश्यक है। मंत्री के बयान के बाद राहा लेन और आसपास के हॉकर्स में राहत और संतोष का माहौल देखा गया। कई दुकानदारों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार पहले नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था की प्रक्रिया अपनाएगी, जिससे उनकी आजीविका पर अचानक संकट नहीं आएगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि जब प्रशासनिक बैठक में पहले नोटिस देने और समय सीमा तय करने का निर्णय लिया गया था, तब उससे पहले बुलडोजर कार्रवाई कैसे हुई। अब सभी की निगाहें नगर निगम के तीन अधिकारियों के जवाब और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।