पोलो ग्राउंड से निकली भव्य शोभायात्रा, “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से गूंजा आसनसोल

Spread the love

पोलो ग्राउंड से निकली भव्य शोभायात्रा, “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से गूंजा आसनसोल

न्यूज डेस्क, आसनसोल : आस्था, श्रद्धा और भक्ति के अनुपम संगम के बीच शुक्रवार को आसनसोल शहर भगवान श्रीजगन्नाथ की भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आया। इस्कॉन आसनसोल की ओर से आयोजित भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पावन उलटी रथयात्रा में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा शहर “जय जगन्नाथ”, “हरे कृष्ण, हरे राम” और “जय बलभद्र, जय सुभद्रा” के जयघोष से गूंज उठा। अनुमानित 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक और भव्य धार्मिक आयोजन में भाग लेकर भगवान के रथ की रस्सी खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। सुबह से ही पोलो ग्राउंड में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, पूरा मैदान श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। महिलाओं, पुरुषों, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित विभिन्न समुदायों के लोग पारंपरिक वेशभूषा में भगवान के दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भगवान के प्रति अटूट आस्था और उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा था। रथयात्रा शुरू होने से पहले वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना, आरती और भोग अर्पण की विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विशेष पूजा की गई। इसके बाद जैसे ही रथ को आगे बढ़ाने के लिए रस्सियां श्रद्धालुओं के हाथों में सौंपी गईं, पूरा वातावरण “जय जगन्नाथ” के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथ को खींचा। रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक वस्त्रों और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित विशाल रथ सभी के आकर्षण का केंद्र बना रहा। रथ पर विराजमान भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की दिव्य झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान के रथ को खींचने और उनके दर्शन करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भव्य शोभायात्रा पोलो ग्राउंड से प्रारंभ होकर कोर्ट मोड़, बीएनआर मोड़, हट्टन रोड, एनएस रोड सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंची। यात्रा मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए घंटों खड़े रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और व्यापारियों ने रथ पर पुष्पवर्षा कर भगवान का भव्य स्वागत किया। जगह-जगह शंखध्वनि, घंटियों की मधुर ध्वनि, ढोल-नगाड़ों की गूंज और हरिनाम संकीर्तन ने पूरे शहर को आध्यात्मिक वातावरण से भर दिया। रथयात्रा के दौरान भजन-कीर्तन मंडलियों ने लगातार भगवान जगन्नाथ की महिमा का गुणगान किया। विदेशी और स्थानीय भक्त भी हरिनाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति के रंग में रंगते नजर आए। अनेक श्रद्धालु नृत्य करते हुए भगवान के रथ के साथ आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, व्यावसायिक और सेवा संगठनों की ओर से दर्जनों सेवा शिविर लगाए गए। इन शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए ठंडा पेयजल, शरबत, फल, प्रसाद, बिस्कुट, मिष्ठान तथा अन्य हल्के जलपान की व्यवस्था की गई थी। भीषण गर्मी के बीच स्वयंसेवकों ने पूरे समर्पण और सेवा भाव से श्रद्धालुओं की सेवा की, जिसकी लोगों ने खुले दिल से सराहना की। रथयात्रा को लेकर प्रशासन की ओर से भी व्यापक तैयारी की गई थी। आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट ने पूरे यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल, ट्रैफिक पुलिस, महिला पुलिसकर्मी तथा सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किया गया। पुलिस और प्रशासन की सतर्कता के कारण पूरा आयोजन शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। आयोजकों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की उलटी रथयात्रा का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। मान्यता है कि रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपनी मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं और उलटी रथयात्रा के दिन पुनः अपने मुख्य धाम लौटते हैं। इस पावन अवसर पर भगवान के रथ को खींचना, उनके दर्शन करना और भक्ति भाव से उनका स्मरण करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होने के लिए दूर-दूर से आसनसोल पहुंचते हैं।पूरे आयोजन के दौरान शहर में धार्मिक सौहार्द, सामाजिक एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिली। सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने मिलकर इस भव्य आयोजन को सफल बनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीजगन्नाथ से विश्व शांति, समाज में सुख-समृद्धि, सभी के उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाली और मानव कल्याण की प्रार्थना की। भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाली यह भव्य उलटी रथयात्रा एक बार फिर आसनसोल के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर लोगों के मन में अमिट छाप छोड़ गई। देर शाम तक पूरा शहर भगवान जगन्नाथ की भक्ति और हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि से गुंजायमान रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *