
न्यूज डेस्क, दुर्गापुर : दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में एक नाबालिग बालिका के साथ कथित दुष्कर्म और उसके बाद हुई निर्मम हत्या की घटना के विरोध में मंगलवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में आक्रोश देखने को मिला। इस घटना को लेकर ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) तथा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल के कई जिलों में विरोध-प्रदर्शन, जुलूस और सभाओं का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच, सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा उन्हें कड़ी से कड़ी कानूनी सजा दिलाने की मांग की। दुर्गापुर में सिटी सेंटर, दुर्गापुर-1, दुर्गापुर-2 और दुर्गापुर-3 एरिया कमेटियों के तत्वावधान में विरोध मार्च निकाला गया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने घटना के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राज्य सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए। विरोध सभा के दौरान मृतका को श्रद्धांजलि देने के लिए मोमबत्तियां भी जलाई गईं तथा दो मिनट का मौन रखकर संवेदना व्यक्त की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस जघन्य घटना में स्थानीय प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जिसके कारण जांच और कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी दोषी को राजनीतिक या सामाजिक संरक्षण न मिले। उनका कहना था कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और पीड़िता के परिवार को शीघ्र न्याय मिलना चाहिए।वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराध गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसी घटनाओं पर केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसी क्रम में आसनसोल और सालानपुर क्षेत्र में भी एआईडीडब्ल्यूए और डीवाईएफआई की ओर से विरोध सभाएं, जुलूस और प्रदर्शन आयोजित किए गए। विभिन्न स्थानों पर लोगों ने एकजुट होकर बारुईपुर की घटना की निंदा की और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मामले की सुनवाई तेज गति से कराई जाए तथा दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। साथ ही राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाने और अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कार्ययोजना लागू करने की भी मांग की गई।