
न्यूज डेस्क, चित्तरंजन : पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के सलानपुर ब्लॉक में मंगलवार सुबह से पुलिस ने व्यापक अभियान चलाते हुए विभिन्न पंचायत कार्यालयों और सरकारी अस्पतालों से जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्रों से संबंधित रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिए। यह कार्रवाई सलानपुर थाना, रूपनारायणपुर पुलिस चौकी और कल्याणेश्वरी पुलिस चौकी की संयुक्त टीम द्वारा की गई। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने सलानपुर ब्लॉक की सभी 11 ग्राम पंचायतों के अलावा पिठाकियारी ग्रामीण अस्पताल में पहुंचकर अब तक जारी किए गए जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े मूल रजिस्टर जब्त किए केवल सलानपुर ब्लॉक तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार के निर्देश पर पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में भी इसी प्रकार का अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की टीमें संबंधित पंचायतों और स्वास्थ्य संस्थानों से रिकॉर्ड एकत्र करंभिक स्तर पर कुछ अनियमितताएं भी सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कहीं एक ही पृष्ठ पर अलग-अलग वर्षों की जन्म प्रविष्टियां दर्ज मिलीं, तो कहीं रजिस्टरों के कुछ पन्ने फटे हुए या क्षतिग्रस्त पाए गए। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों का कहना है कि कई रजिस्टर 30 से 35 वर्ष पुराने हैं और लंबे समय तक उपयोग तथा उचित रखरखाव के अभाव में उनकी स्थिति खराब हो गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल रजिस्टरों की स्थिति के आधार पर किसी प्रकार की अनियमितता का निष्कर्ष नहींपत्रों का व्यापक सत्यापन करना है, ताकि यदि कहीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए हों या रिकॉर्ड में किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई हो, तो उसका पता लगाया जा सके। इसी उद्देश्य से पुराने रजिस्टरों को। अधिकारियों के मुताबिक, इन रजिस्टरों को जांच के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल सलानपुर ब्लॉक तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार के निर्देश पर पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में भी इसी प्रकार का अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की टीमें संबंधित पंचायतों और स्वास्थ्य संस्थानों से रिकॉर्ड एकत्र कर रही हैं, ताकि उनका सत्यापन किया जा सके। जांच के दौरान कुछ पंचायतों में रिकॉर्ड के रखरखाव को लेकर प्रारंभिक स्तर पर कुछ अनियमितताएं भी सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कहीं एक ही पृष्ठ पर अलग-अलग वर्षों की जन्म प्रविष्टियां दर्ज मिलीं, तो कहीं रजिस्टरों के कुछ पन्ने फटे हुए या क्षतिग्रस्त पाए गए। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों का कहना है कि कई रजिस्टर 30 से 35 वर्ष पुराने हैं और लंबे समय तक उपयोग तथा उचित रखरखाव के अभाव में उनकी स्थिति खराब हो गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल रजिस्टरों की स्थिति के आधार पर किसी प्रकार की अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार का उद्देश्य पिछले कई दशकों में जारी किए गए जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का व्यापक सत्यापन करना है, ताकि यदि कहीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए हों या रिकॉर्ड में किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई हो, तो उसका पता लगाया जा सके। इसी उद्देश्य से पुराने रजिस्टरों को सुरक्षित कर उनकी जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक सरकारी समीक्षा में यह भी पाया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की अवधि से पहले और उसके दौरान जन्म प्रमाणपत्र जारी होने की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। जहां सामान्य परिस्थितियों में प्रतिवर्ष औसतन तीन से साढ़े तीन लाख जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होते हैं, वहीं संबंधित अवधि में यह संख्या बढ़कर पांच से दस लाख तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है। बताया जा रहा है कि जब्त किए गए सभी रजिस्टरों के प्रत्येक पृष्ठ को डिजिटल रूप से स्कैन कर उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञ स्तर पर रिकॉर्ड का मिलान कर यह जांच की जाएगी कि कहीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जारी तो नहीं किए गए, रिकॉर्ड में किसी प्रकार का हेरफेर तो नहीं हुआ, अथवा सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ लेने या अन्य किसी उद्देश्य से दस्तावेजों का दुरुपयोग तो नहीं किया गया। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग इस पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की अनियमितता या जिम्मेदारी के संबंध में आधिकारिक रूप से कुछ कहा जा सकेगा।





