
साइबर फ्रॉड के मामले में 1.49 करोड़ रुपये बरामद कर पीड़ित को लौटाए गए
न्यूज डेस्क, रानीगंज : साइबर अपराध के एक बड़े मामले में दुर्गापुर साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई और लगातार किए गए फॉलो-अप के परिणामस्वरूप 1,49,30,644 रुपये की राशि बरामद कर शिकायतकर्ता के खाते में वापस जमा कराई गई। इस मामले में कुल 2.50 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी का आरोप है। पुलिस की तत्परता और संबंधित बैंकों के साथ समन्वय के चलते ठगी की गई रकम के एक बड़े हिस्से को सुरक्षित कर वापस कराने में सफलता मिली है। पुलिस के अनुसार, घटना की शिकायत 15 सितंबर 2026 को दुर्गापुर साइबर सेल में दर्ज कराई गई थी। शिकायत के मुताबिक, साइबर अपराधी ने खुद को शिकायतकर्ता के रूप में पेश किया और कथित तौर पर उसके एक कर्मचारी को निर्देश देकर अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवा दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल ने शिकायत पर तत्काल कार्रवाई शुरू की। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल की ओर से मामले को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कराई गई। इसके बाद घटना के संबंध में रानीगंज थाना में केस संख्या 390/26, दिनांक 16 सितंबर 2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।
बैंकों के साथ समन्वय कर रकम की बरामदगी : मामले की जांच के दौरान साइबर सेल ने संबंधित बैंक अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क और समन्वय स्थापित किया। पुलिस की ओर से समय रहते की गई कार्रवाई, बैंकिंग चैनल के माध्यम से लेनदेन की निगरानी और लगातार फॉलो-अप के परिणामस्वरूप 1,49,30,644 रुपये की रकम बरामद की जा सकी। बरामद राशि को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद शिकायतकर्ता के बैंक खाते में वापस क्रेडिट करा दिया गया। बड़ी रकम की साइबर ठगी के मामले में इतनी राशि की बरामदगी पीड़ित के लिए महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है। ठगी की पूरी प्रक्रिया, रकम के हस्तांतरण से जुड़े बैंक खातों और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने एक बार फिर नागरिकों से अपील की है कि साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर बिल्कुल भी समय बर्बाद न करें। साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होगी, संबंधित बैंकिंग चैनल में रकम के आगे हस्तांतरण को रोकने और उसे फ्रीज या बरामद कराने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन या साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है या नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क किया जा सकता है। पुलिस ने नागरिकों को यह भी सलाह दी है कि बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन और अन्य वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। किसी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश के जरिए पैसे ट्रांसफर करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना जरूरी है। दुर्गापुर साइबर सेल की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि साइबर ठगी के बाद तत्काल शिकायत और पुलिस-बैंक के बीच तेज समन्वय रकम की बरामदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और शेष रकम तथा पूरे साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।